Neuralink: इंसानों के दिमाग में छह महीने में ‘चिप’ लगाएंगे एलन मस्क, न्यूरालिंक टेक्नोलॉजी पर किया बड़ा ऐलान

elon-musk-95905715-12cb8289

Neuralink: एलन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक इंसानों के दिमाग में चिप लगाने की प्लानिंग कर रही है। अगले छह महीने में पहला इंसानी ट्रायल किया जा सकता है। एलन मस्क ने इसके साथ ही दो नई टेक्नोलॉजी का खुलासा किया है। एक टेक्नोलॉजी रीढ़ की हड्डी के लिए है, जो लकवाग्रस्त लोगों को फिर से चला सकता है।
वॉशिंगटन: एलन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक कॉर्प अगले छह महीने में इंसानी दिमाग में चिप लगाने की योजना बना रही है। सिक्के के आकार का ये चिप रोगियों में डाला जाएगा। न्यूरालिंक ने बुधवार को कैलिफोर्निया में इसकी घोषणा की। न्यूरालिंक अपने प्रोडक्ट को बेहतर बनाने में लगा हुआ है। इस चिप में तार होता है, जो इंसानी खोपड़ी का एक हिस्सा बनाया जाएगा। एलन मस्क के मुताबिक अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के साथ चल रही चर्चा कंपनी के लिए काफी अच्छी रही है, और अगले छह महीने में पहले इंसानी परीक्षण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

न्यूरालिंक दिमाग के साथ ही शरीर के अन्य हिस्सों में चिप को प्रत्यारोपण का लक्ष्य रखता है। एलन मस्क ने दो अन्य उत्पादों का खुलासा किया है। नई चिप को रीढ़ की हड्डी में लगाया जाएगा। कंपनी का मानना है कि लकवाग्रस्त किसी भी व्यक्ति को यह फिर से ठीक कर सकता है। इसके साथ ही इंसानी दृष्टि को भी बेहतर करने वाली टेक्नोलॉजी लाने का प्लान है। एलन मस्क ने कहा, ‘यह सुनने में जितना चमत्कारी लगता है, हमें विश्वास है कि हम इसे पूरा कर सकेंगे। हमारी टेक्नोलॉजी पूरे शरीर को ठीक कर सकेगी। किसी की रीढ़ की हड्डी टूटी हो तो उसे भी ठीक किया जा सकेगा।’

सिर्फ सोच कर ही कही जा सकेगी बात

एलन मस्क जिस ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस की बात कर रहे हैं उससे एक बीमार व्यक्ति बिना कुछ बोले सिर्फ सोचने से ही अपनी बात कह सकेगा। न्यूरालिंक डिवाइस न्यूरोनल एक्टिविटी से मनुष्यों और मशीनों के बीच सूचना का आदान-प्रदान कर सकता है। न्यूरालिंक के पिछले कुछ इवेंट्स में मस्क और उनकी टीम ने इसका प्रदर्शन किया है। न्यूरालिंक की टेक्नोलॉजी के आलोचक भी है। कुछ आलोचकों का आरोप है कि मस्क न्यूरालिंक की प्रगति को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहे हैं। इसके साथ ही उन चीजों का वादा कर रहे हैं, जिसकी उम्मीद नहीं है।

ब्रेन-मशीन इंटरफेस की टेक्नोलॉजी पर दशकों से शोध हो रहा है। लेकिन मस्क की एंट्री से इस पर लोगों का ध्यान गया है। ह्यूमन ट्रायल के मामलों में कुछ स्टार्टअप न्यूरालिंक से आगे हैं। उदाहरण के लिए सिंक्रोन इंक नाम की कंपनी ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में मरीजों के दिमाग में एक छोटा सा स्टेंट के आकार का उपकरण लगाने में सक्षम रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक बिना कुछ बोले मरीज अपने विचारों को कंप्यूटर के जरिए कह सकते हैं।

Leave a Reply